Narendra Modi की 2026 की Israel यात्रा:
भारत-इज़राइल संबंधों को नई दिशा
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा 2026 अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और इज़राइल पिछले कई दशकों से रक्षा, कृषि, तकनीक और व्यापार के क्षेत्रों में मजबूत सहयोग करते रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच इन संबंधों को और मजबूत बनाना और नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाना है।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
भारत-इज़राइल संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और इज़राइल के बीच आधिकारिक राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। रक्षा तकनीक, कृषि अनुसंधान, जल प्रबंधन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ा है।
2017 में प्रधानमंत्री मोदी की पहली इज़राइल यात्रा ने इन संबंधों को एक नई ऊँचाई दी थी। वह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इज़राइल यात्रा थी और इसे ऐतिहासिक माना गया था।
इज़राइल के नेताओं से मुलाकात
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इज़राइल के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की, जिनमें इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और राष्ट्रपति Isaac Herzog शामिल हैं।
इन बैठकों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, व्यापार, तकनीकी साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और इज़राइल के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक और दीर्घकालिक साझेदारी का उदाहरण हैं।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
भारत और इज़राइल के संबंधों में रक्षा क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इज़राइल भारत को कई आधुनिक रक्षा तकनीक और उपकरण प्रदान करता है।
इस यात्रा के दौरान निम्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई:
आधुनिक मिसाइल तकनीक
ड्रोन और निगरानी प्रणाली
साइबर सुरक्षा
सीमा सुरक्षा तकनीक
इन क्षेत्रों में सहयोग से भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
व्यापार और निवेश
भारत और इज़राइल के बीच व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों ने Free Trade Agreement (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा की।
FTA लागू होने से:
दोनों देशों के बीच व्यापार में तेजी आएगी
निवेश के नए अवसर बनेंगे
तकनीकी सहयोग बढ़ेगा
स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा
भारत और इज़राइल दोनों ही स्टार्टअप और तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए इस क्षेत्र में साझेदारी को खास महत्व दिया जा रहा है।
तकनीक और इनोवेशन में सहयोग
इज़राइल को दुनिया का “Startup Nation” कहा जाता है क्योंकि वहाँ तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप की संख्या काफी ज्यादा है।
भारत और इज़राइल के बीच निम्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
साइबर सुरक्षा
फिनटेक
हेल्थ टेक्नोलॉजी
कृषि तकनीक
इन क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और निवेश से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है।
कृषि और जल प्रबंधन
इज़राइल अपनी उन्नत कृषि तकनीक और जल प्रबंधन प्रणाली के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
भारत में कई राज्यों में पहले से ही इज़राइल-भारत कृषि परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराना है।
इस यात्रा में इन परियोजनाओं को और विस्तार देने पर चर्चा हुई ताकि भारतीय किसानों को बेहतर उत्पादन और पानी की बचत वाली तकनीक मिल सके।
रणनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक रणनीतिक महत्व भी है।
इस यात्रा से:
मध्य-पूर्व में भारत की कूटनीतिक स्थिति मजबूत होगी
भारत और इज़राइल के बीच रणनीतिक साझेदारी और गहरी होगी
रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे
आज के समय में जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है, तब भारत का अपने भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2026 की इज़राइल यात्रा भारत-इज़राइल संबंधों को एक नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। रक्षा, तकनीक, व्यापार और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएँ इस यात्रा के दौरान मजबूत हुई हैं।
दोनों देशों के नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य में भारत और इज़राइल मिलकर कई वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं और तकनीकी विकास तथा सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत साझेदारी बना सकते हैं।
इस यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि भारत और इज़राइल के संबंध आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत और व्यापक होने वाले हैं।