मार्च का महीना शुरू होते ही महाराष्ट्र के प्रमुख शहर Pune में गर्मी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। आमतौर पर मार्च के शुरुआती दिनों में मौसम हल्का गर्म होता है, लेकिन इस साल तापमान तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। शहर के कई इलाकों में तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे लोगों को दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है।
6 मार्च को शहर के प्रमुख मौसम केंद्रों पर इस साल का अब तक का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर और अधिक महसूस होगा।
पुणे के अलग-अलग इलाकों में तापमान
मौसम की जानकारी देने वाली संस्था India Meteorological Department (IMD) के अनुसार पुणे के विभिन्न इलाकों में तापमान अलग-अलग दर्ज किया गया।
Shivajinagar – 36°C
Pashan – 36°C
Chinchwad – 36°C
National Defence Academy – 36°C
Koregaon Park – 38°C
Lohegaon – 38°C
इन आंकड़ों से साफ है कि शहर के कई हिस्सों में गर्मी का असर काफी ज्यादा है। खासतौर पर कोरेगांव पार्क और लोहेगांव जैसे इलाकों में तापमान सबसे अधिक दर्ज किया गया।
इस साल अब तक की सबसे ज्यादा गर्मी
मार्च की शुरुआत में ही इतना ज्यादा तापमान दर्ज होना इस साल की सबसे बड़ी गर्मी मानी जा रही है। सामान्य तौर पर फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन इस बार यह बढ़ोतरी थोड़ी तेज दिखाई दे रही है।
दिन के समय तेज धूप के कारण सड़कें गर्म हो जाती हैं और लोगों को बाहर निकलने में काफी परेशानी होती है। दोपहर के समय शहर की सड़कों पर भीड़ कम दिखाई देने लगी है क्योंकि लोग गर्मी से बचने के लिए घरों या ऑफिस के अंदर रहना पसंद कर रहे हैं।
सप्ताहांत में और बढ़ सकता है तापमान
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले वीकेंड में तापमान और बढ़ सकता है। India Meteorological Department ने अनुमान लगाया है कि आने वाले दो-तीन दिनों में पुणे का अधिकतम तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
इसके बाद 10 मार्च से तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक जाने की संभावना जताई गई है। अगर मौसम का यही रुख बना रहा तो आने वाले दिनों में गर्मी और ज्यादा महसूस हो सकती है।
क्या आएगा हीटवेव का खतरा?
मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति सामान्य मानी जा रही है। अभी तापमान सामान्य से लगभग 4-5 डिग्री अधिक है, लेकिन इसे हीटवेव की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
तापमान सामान्य से 4-6 डिग्री ज्यादा हो
यह स्थिति लगातार कई दिनों तक बनी रहे
अगर आने वाले दिनों में तापमान 40 डिग्री के पार जाता है, तो India Meteorological Department की ओर से हीटवेव अलर्ट जारी किया जा सकता है।
गर्मी बढ़ने के पीछे क्या कारण हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार मार्च के महीने में तापमान बढ़ने के कई कारण होते हैं।
- सूर्य की सीधी किरणें
मार्च के महीने में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर ज्यादा सीधे पड़ने लगती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है।
- ठंडी हवाओं का कम होना
सर्दियों के दौरान उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं तापमान को नियंत्रित रखती हैं, लेकिन मार्च आते-आते इन हवाओं का असर कम हो जाता है।
- शहरीकरण
तेजी से बढ़ते शहरों में कंक्रीट की इमारतें, सड़कें और वाहनों की संख्या अधिक होने से “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे तापमान ज्यादा महसूस होता है।
लोगों को हो रही है परेशानी
तेज धूप और बढ़ती गर्मी के कारण लोगों की दिनचर्या पर भी असर पड़ने लगा है। दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर लोगों की संख्या कम हो जाती है।
कई लोग गर्मी से बचने के लिए:
छाता या टोपी का इस्तेमाल कर रहे हैं
ठंडे पेय और नारियल पानी पी रहे हैं
हल्के और सूती कपड़े पहन रहे हैं
छात्रों और ऑफिस जाने वाले लोगों को भी गर्मी की वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों के अनुसार बढ़ती गर्मी के दौरान लोगों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो डिहाइड्रेशन, थकान और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
गर्मी से बचने के लिए जरूरी उपाय
दिन भर में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं
दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर जाने से बचें
हल्के और ढीले कपड़े पहनें
ज्यादा कैफीन और तैलीय भोजन से बचें
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से गर्मी से बचाव करने की जरूरत होती है क्योंकि उनका शरीर जल्दी प्रभावित हो सकता है।
अप्रैल और मई में और बढ़ेगी गर्मी
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च की यह गर्मी आने वाले महीनों का संकेत हो सकती है। आमतौर पर अप्रैल और मई के महीनों में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है।
अगर मार्च में ही तापमान 38 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है, तो संभावना है कि अप्रैल-मई में यह 40 से 42 डिग्री तक भी जा सकता है।
मौसम में बदलाव का असर
पिछले कुछ वर्षों में मौसम के पैटर्न में भी बदलाव देखा गया है। कभी अचानक बारिश हो जाती है तो कभी तापमान अचानक बढ़ जाता है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को भी इसका एक कारण माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में गर्मी का असर और ज्यादा देखने को मिल सकता है।
प्रशासन की तैयारी
बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी सतर्क हो गया है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम को गर्मी से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
अगर तापमान बहुत ज्यादा बढ़ता है तो स्कूलों के समय में बदलाव या अन्य आवश्यक कदम भी उठाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
मार्च की शुरुआत में ही Pune में गर्मी का ; असर साफ दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी होने की संभावना है। हालांकि फिलहाल मौसम विभाग ने इसे सामान्य स्थिति बताया है, लेकिन अगर तापमान 40 डिग्री के पार जाता है तो India Meteorological Department हीटवेव अलर्ट जारी कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि लोग अभी से सावधानी बरतें, पर्याप्त पानी पिएं और तेज धूप से बचने की कोशिश करें।
गर्मी का असर पर्यावरण और जल संसाधनों पर
बढ़ते तापमान का असर केवल लोगों की दिनचर्या पर ही नहीं बल्कि पर्यावरण और जल संसाधनों पर भी पड़ता है। जब तापमान लगातार बढ़ता है तो शहर के कई जलाशयों और झीलों का पानी धीरे-धीरे कम होने लगता है। Pune जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में पानी की मांग पहले से ही अधिक है, ऐसे में गर्मी के मौसम में पानी की समस्या और भी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले महीनों में पानी की खपत भी काफी बढ़ जाएगी। लोग पीने, नहाने और अन्य घरेलू कामों के लिए अधिक पानी का उपयोग करते हैं, जिससे जल आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है।
इसके अलावा बढ़ती गर्मी का असर पेड़-पौधों और जानवरों पर भी पड़ता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण कई पौधे जल्दी सूखने लगते हैं और पक्षियों तथा जानवरों को पानी ढूंढने में कठिनाई होती है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में लोगों को अपने आसपास पेड़ लगाना चाहिए और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।
अगर नागरिक और प्रशासन मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करें तो बढ़ती गर्मी के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए गर्मी के मौसम में पानी की बचत और पर्यावरण की सुरक्षा बेहद जरूरी हो जाती है।